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डा केसर सिह सोलकी,जयपुर

"युवा शक्ति – समाज शक्ति आज समाज में परिवर्तन की मशाल युवाओ के मजबूत हाथों में देने की आवश्यकता है । पिछले चार पांच सालों में युवाओ ने ही सोशल मीडिया के माध्यम से समाज को बदलने की अलख जगाने का काम हाथ में ले रखा है। खुल कर सामने आए हैं । समाज के विभिन्न मंचों पर युवा पीढ़ी ने केसरिया रंग के साफे को धारण कर मानो सम्पूर्ण विकास एवं मजबूत समाज बनने तक अनवरत आहूति देने का संकल्प ले लिया है । आवश्यकता है समाज के अग्रिम पंक्ति के बन्धु निस्वार्थ भाव से मार्गदर्शक की भूमिका का निर्वहन कर इस बढ़ते कारवां को नई दिशा देने का कार्य मन से करें । युवा शक्ति या फिर यह कहिए युवा होना सिर्फ एक अवस्था नहीं है यह किसी दीप की वह अवस्था है। जिस समय उससे सबसे अधिक प्रकाश की अपेक्षा की जाती है। इसके लाभ और इससे की जाने वाली अपेक्षाओं को हमने पिछले कुछ समय में महसूस किया है और इस समय तो इसे समाज निर्माण के प्रमुख आधार के रूप में देखा जा रहा है। युवा शक्ति ही वह शक्ति है जिसने युगों का निर्माण किया। जिसकी देख रेख में सभ्यता आगे बढ़ी। युवा शक्ति ने ही विश्व में महाशक्तियों का निर्माण किया और वह युवा शक्ति ही थी जिसने इस देश को उस शक्ति से मुक्त कराया जिसका कभी सूर्य अस्त ही नहीं होता था। युवा शक्ति को कर्मण्य बनाये रखना, उसे संचित व पोषित करना भी बेहद जरूरी है क्योंकि उसकी दृढ़ता से असम्भव को सम्भव किया जा सकता है। यदि युवा शक्ति पूर्ण बल, बुद्धि एवं निस्वार्थ भाव से समाज निर्माण के कार्य में लग जाय तो समाज का कायाकल्प हो सकता है। युवा शक्ति ही वह शक्ति है जो भविष्य के लिये मार्ग निर्माण करती है। गाँधी जी इसका प्रमुख उदाहरण थे। एक ड्डशकाय शरीर से दुबला पतला मानव इतना बड़ा और महान कार्य कैसे सम्पादित कर सकता था। लेकिन उन्होंने किया क्योंकि युवा होना आत्मा की शक्ति है। युवा होने का अर्थ दिल से महसूस किया जाता है। युवा होने का अर्थ है संचित शक्तियों का भण्डार। अपनी शक्तियों को पहचानना और उसका उपयोग करना। युवा शक्ति इतनी प्रभावशाली है कि उसके लिए स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा, ‘‘उतिष्ठ जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।।’’ अर्थात उठो, जागो और जब तक अभिसिप्त वस्तु को प्राप्त नहीं कर लेते। युवा अवस्था की व्याख्या को हम जर्मन लेखक गेटे के शब्दों में समझें तो उन्होंने कहा कि दुनिया नौ जवानों को इसलिए चाहती है कि वे होनहार होते हैं। उनमें कुछ कर गुजरने की ललक होती है। उनमें सम्भावनाऐं अधिक होती हैं। परन्तु आज के समय में इस शक्ति में कुछ संक्रमण भी महसूस हो रहा है। युवा शक्ति कई बार नशा, उपेक्षा और राजनीति का भी शिकार हो जाती है। युवा शक्ति का जाग्रत होना बेहद आवश्यक है। यह अनेक शक्तियों से युक्त है। अंत में युवाओं से कि तुम सर्वशक्तिमान हो तुम नहीं कह सकते कि यह हो नहीं सकता। यह आलस्य भरी निद्रा तुम्हें शोभा नहीं देती। तुम ना तो दुर्बल हो, ना ही क्षीण हो, तुम कर्म का स्वरूप हो, तुम कर्म वीर हो क्योंकि तुम युवा हो।"