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दाऊसिह राजावत ,जोधपुर

"आओ हम सब मिलकर नये वर्ष आगमन का मंगलमय स्वागत करें बुजुर्गो ,हम उम्र के भाईयों अनुजो ,माताओं, बहनो व हमारे प्यारे नौनिहाल सभी को नये वर्ष 2017 की बहुत बहुत बधाई शुभकामनाएँ हालांकि हमारा नया साल पारम्परिक तरीके से हिन्दू सस्कृति को चैत्र मास को होता है पर निश्चित रूप से हमें दुनिया के साथ चलना है इसलिए हम हर व्यवस्था को गौरवान्वित करने को सक्षम है हमारे देश व समाज के पास वह चमत्कारिक कलेजा है जिसमें सभी का आदर करते हैं रही समाज की बात तो हम 2016 के विभिन्न अच्छे व कटु अनुभव के साथ 2017 में प्रवेश करने जा रहे हैं तमाम उत्थान विकास शिक्षा राजनीतिक समाजिक व्यापारिक समीक्षा के समीकरणों के अनुभव के लाभ विभिन्न सस्था द्वारा किये कार्य कर्मों का सफल सफर दायित्व से निस्वार्थ भावना से निर्वाह कर समाज को गौरवान्वित किया उसके हम तहेदिल से आभारी हैं आने वाला 2017 महत्वपूर्ण के साथ चुनौतियों से भरा है हमे स्वाभिमान के साथ हमारी 2016 की त्रुटी जो भी कमियां रही उन्हें सफलता पूर्वक सकारात्मक सोच के साथ सहभागिता निभाते हुए पूर्ण करना है शिक्षा सबसे अहम व महत्वपूर्ण बिन्दु है समाज के पटल पर हालांकि इस पर शिक्षा के लिए रावणा सम्पर्क व अन्य संस्थाओं को हम साधुवाद देते हैं प्रयास भी सकारात्मक ऊर्जा के साथ है पर निश्चित रूप से सहयोग ओर सहभागिता नगण्य है इसे किसी भी प्रकार से एक मत होकर इस महत्वपूर्ण व जलवन्तशील मुद्दे पर पूरी ताकत झोंकनी होगी शिक्षा ही समाज का आईना विकास उत्थान व विवेक के बल पर हर कार्य सम्भव है संस्थाएं खण्ड -खण्ड में बटी सभी समाज की निष्क्रिय संस्थाओं को आमंत्रित कर एक जुट करने की जरूरत है ओर अगर कोई संस्था व निजी स्वार्थ के लिए विलय नहीं होती तो निश्चित ही निशंकोच उसका बहिष्कार के साथ संख्या बल के साथ उन्हें विलय कर लेना होगा अपितु यह समाज के लिए घातक साबित होगा अधिकारी व सरकारी कर्मचारी सबसे ज्यादा है समाज में ,वह बडे पैमाने पर अधिकारी व सरकारी कर्मचारी स्वयं को आईडेटीफाई नहीं करते हम मानते हैं उनकी भी कई मजबूरियां है कई व्यवस्थाओं को ध्यान रखना पड़ता है पर हकीकत में समाज बन्धु आने पर अपना परिचय समाज के बन्धुओं को देना चाहिए और जो मिलने गया उसे भी खुलकर परिचय देना चाहिए समस्या सबसे जटिल व जलवन्तशील समस्या यह है कि हम ओर हमारे बन्धुओं को रावणा राजपूत कहने में शर्म महसूस करते हैं और आज उसी कारण हम सब मायनों में सफल होते हुए भी पिछड़े हुए हैं संख्या बल होते हुए भी ओर जब बच्चे बड़े हो जाते है तब समाज की ओर अग्रसर होते हैं विकट समस्या है मैने लिखा है कि अपनी व्यक्तिगत जीवन की व्यवस्था को रखे मगर समाज में अपनी सहभागिता जरूरी है हमारे यहां पर दुर्भाग्य कहे या किसी के शिकार बहुत बार सोचा भी इस दुर्दशा का मुख्य कारण हम खुद है हम हमारे ही समाज बन्धुओं को गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ते हम प्रयास के साथ यह दृढ निर्णय ले की हमारा कोई भी बन्धु किसी दल में योग्यता रखता है उसे हम तन मन धन से सहयोग निभाने का वादा करते हुए उसका किसी प्रकार का विरोध ना करे यही सफलता की कुंजी होगी "