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केसरसिह सोलकी.,जयपुर

"मैंने ग्रूप ज्वॉइन करने के बाद से ऐसा महसूस किया है कि ग्रूप में शामिल बन्धुओं में से मुश्किल से 20 लोगों की सक्रियता नजर आती है । मेरा ऐसा मानना था कि शेष लोग ध्यान मुद्रा में गंभीरता से समाज हित में मनन करने के बाद समय आने पर अपनी बात रखेंगे लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ । मित्रो , मुझे यहां राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की इन पंक्तियों का ख्याल आता है "समर शेष है, नही पाप का भागी केवल व्याघ्र जो तटस्थ रहे हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध " यह बात सही है कि समाज विकास की लम्बी लड़ाई लडनी है लेकिन इसको कमजोर करने का श्रेय यदि किसी को जाता तो उन लोगों को जो तटस्थता का भाव बना लेते हैं । जिन लोगों ने सक्रियता दिखानी शुरू की है उन लोगों को सही सिरा पकड़ में नहीं आ रहा है एक सिरे से शुरुआत करते हैं दूसरा छूट जाता है दूसरे को साधने के प्रयास में पहला कमजोर हो जाता है फिर उसे नए सिरे से शुरू करना पड़ता है । इस तरह उर्जा का सदुपयोग समाज हित में नहीं हो पाया है । इतने नरपत सिंह जी दाऊ सिंह जी शंकर सिंह जी मूल सिह जी रणजीत सिंह जी रणवीर सिंह जी एवं तमाम सिंह जी फिर कहा से लाओगे ? किसी के भी जूनून की एक सीमा होती है । समय देना ओर पैसा खर्च करना हर किसी के बस की बात नहीं है । आज कुछ भाई पूरे मनोयोग से समाज सेवा एवम् समाज की प्रगति की दिशा तय करने में लगे हुए हैं । लेकिन अकेला आदमी बोझ नहीं उठा सकता अलग अलग व्यक्ति अलग अलग समय एवं सिरे से भी नहीं उठा सकते हैं । सामूहिक सोच एवं प्रयासों से ही यह संभव हो सकता है । वर्तमान समय में इस बात को समझना होगा । गंभीरता का सर्वथा अभाव नज़र आता है । किसी एक विषय पर सार्थक चर्चा होकर परिणाम तक पहुंचने से पूर्व ही दूसरा विषय छेड दिया जाता है यह क्रम अनंत रूप से चल रहा है । ग्रुप एडमिन की भावनाओं, ग्रुप के उद्देश्यों को दरकिनार कर बिना मतलब की बातें कर न वरन् स्वयं का समय खराब करते हैं बल्कि अन्य सदस्यों की भावनाओं का भी आदर नहीं करते हैं । अतः इस ग्रुप के प्लेटफार्म के माध्यम से निवेदन करना चाहूँगा कि जो भी उद्देश्य/लक्ष्य निर्धारित किया जावे उसे प्राप्त करने से पूर्व दूसरा विषय नही लावे । छोटे छोटे प्रयासों से ही आगे बढ़ सकते हैं । ग्रूप में भी जो विषय चर्चा के लिए लाया जावे या जिस विषय पर चर्चा चल रही हो उसमें भाग लेवे रचनात्मक सुझाव देवे विषय की समाप्ति से पूर्व नया विषय post नहीं करे । बुराईयां अथवा कमियों का आकलन करना आसान है किन्तु इनके निराकरण का रास्ता निकालने व इनको दूर करने की जिम्मेदारी लेकर काम करना दूभर हो जाता है ।"