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रतनसिह तंवर,पाली

"भारत देश की शासन वयवस्था लोकतांत्रिक हे। जिसे नेता लोग चलाते हे जिसके लिए किसी शैक्षणिक योग्यता की जरुरत नहीं हे जबकि सरकारी नोकरी पाने के लिए योग्यता चाहिए आज समाज के प्रत्येक नागरिक की इच्छा होती हे की हमारे समाज के ज्यादा से ज्यादा सांसद, विधायक, प्रधान, सरपंच, व् पार्षद हो। अब प्रश्न उठता हे की यह संभव कैसे हो ? इच्छा तो सभी करते हे लेकिन इसके लिए कोई ठोस प्रयास नहीं करता हे हमें इसके लिए प्रत्येक ग्राम तहसील जिला स्तर पर लोगो में राजनितिक चेतना का अलख जगाना होगा और उन्हें समझना होगा की पिछले कई वर्षो से हम वोट देते आ रहे हे। हमें क्या मिला और क्या हमें मिलना चाहिए था जबकि वोट तो वो ताकत हे जो एक साधारण आदमी को भी राजा बना देता हे। आजादी से पूर्व राजा माँ के पेट से पैदा होता था लेकिन आज इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन से पैदा होता हे हमें इसे गंभीरता से समझना होगा। जब बात इतनी साधारण हे तो हम सफ़ल क्यों नहीं हो रहे हे आज समाज का राजनितिक प्रतिनिधित्व बढ़ाना हे तो व् बड़े बड़े सम्मेलनों से नहीं बढेगा। उसे बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की जरुरत हे । हर बार चुनाव का मौसम आता हे बहुत से पड़े लिखे चुनावी मौसम में नेता बन जाते हे। अब प्रश्न ये उठता हे की समाज का राजनितिक प्रतिनिधित्व कैसे बढे प्रथम तो हमें जमीनी स्तर पे राजनेतिक पार्टी के कार्यकर्त्ता पैदा करने होंगे ।इसके लिए हमें समाज के बुद्धिजीवी लोगो द्वारा समाज को बडे पैमाने पर सन्देश दिया जाना चाहिए की समाज के प्रत्येक घर से कम से कम एक व्यक्ति जो सरकारी नोकरी नहीं करते हो किसी न किसी राष्टीय राजनेतिक पार्टी का सक्रीय कार्यकर्त्ता बनना चाहिए। जैसे जैसे राजनेतिक पार्टी में समाज के सक्रीय कार्यकर्ताओ की संख्या बढ़ेगी वेसे -वेसे समाज का राजनितिक प्रतिनिधित्व बढ़ता जायेगा। ये एकमात्र सीधा सरल व् मजबूत रास्ता हे जिसका कोई तोड़ नहीं पार्टी में समाज की सक्रियता ज्यादा होगी नतीजा वो पार्टी पधाधिकारी बनेंगे जो टिकटों का बटवारा करते हे और समाज के पार्षद बढ़ेंगे पार्षद बढ़ेगा तो चैयरमेन बनेगा चैयरमेन होगा तो विधायक बनेगा विधायक होगा तो सांसद भी बनेगा सांसद होगा तो मंत्री भी बनेगा। दूसरा समाज का राजनेतिक प्रतिनिधित्व बढ़ने के लिए समाज के वोटबैंक को संगठित करने के लिए प्रत्येक वोटर को समझना जरुरी हे की जब तक समाज का वोट पार्टियो और पॉलिटिक्स में बिखरा रहेगा तब तक समाज के वोट का मोल भाव कुछ नहीं होगा इसके लिए हमें जमीनी स्तर पर निर्वाचन क्षैत्रानुसार वोट को संगठित कर एक ही पार्टी को देना होगा। हमें अपने वोट की कीमत पैदा करनी होगी और कीमत केवल वोट को संगठित करके ही पैदा की जा सकती हे जिसकी शरुआत सर्वप्रथम घर से करनी होगी फिर गली मोहल्ला गांव तहसील जिला स्तर पर संगठित करना होगा जिससे समाज का राजनितिक आधार मजबूत होगा और राजनेतिक पार्टी ऐसे समाज पर पेनी नजर रखती है और उन्हें हाथो हाथ लेगा जिससे हमारा राजनेतिक प्रतिनिधित्व बढेगा हमें यह काम स्वयं करना होगा ।"